Sunday, January 03, 2016

पूर्णिमा वर्मन


जन्म :  27 जून 1955 को पीलीभीत में।

शिक्षा : 
संस्कृत साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि, स्वातंत्र्योत्तर संस्कृत साहित्य पर शोध, पत्रकारिता और वेब डिज़ायनिंग में डिप्लोमा।

कार्यक्षेत्र :
पूर्णिमा वर्मन का नाम वेब पर हिंदी की स्थापना करने वालों में अग्रगण्य है। 1996 से निरंतर वेब पर सक्रिय, उनकी जाल पत्रिकाएँ अभिव्यक्ति तथा अनुभूति वर्ष 2000 से अंतर्जाल पर नियमित प्रकाशित होने वाली पहली हिंदी पत्रिकाएँ हैं। इनके द्वारा उन्होंने प्रवासी तथा विदेशी हिंदी लेखकों को एक साझा मंच प्रदान करने का महत्त्वपूर्ण काम किया है। लेखन एवं वेब प्रकाशन के अतिरिक्त वे जलरंग, रंगमंच, संगीत तथा हिंदी के अंतर्राष्ट्रीय विकास के अनेक कार्यों से जुड़ी हैं।

संप्रति : 
संयुक्त अरब इमारात के शारजाह नगर में साहित्यिक जाल पत्रिकाओं 'अभिव्यक्ति' और 'अनुभूति' के संपादन और कला कर्म में व्यस्त।

पुरस्कार व सम्मान : 
दिल्ली में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, साहित्य अकादमी तथा अक्षरम के संयुक्त अलंकरण "प्रवासी मीडिया सम्मान", जयजयवंती द्वारा जयजयवंती सम्मान, रायपुर में सृजन गाथा के "हिंदी गौरव सम्मान", विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर द्वारा मानद विद्यावाचस्पति (पीएच.डी.) की उपाधि तथा केंद्रीय हिंदी संस्थान के पद्मभूषण डॉ. मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार से सम्मानित।

प्रकाशित कृतियाँ : 
कविता संग्रह : पूर्वा, वक्त के साथ एवं चोंच में आकाश
संपादित कहानी संग्रह- वतन से दूर

चिट्ठा : चोंच में आकाश, एक आँगन धूप, नवगीत की पाठशाला, शुक्रवार चौपाल, अभिव्यक्ति अनुभूति।
अन्य भाषाओं में- फुलकारी (पंजाबी में), मेरा पता (डैनिश में), चायखाना (रूसी में)

संपर्क : purnima.varman@gmail.com 
फेसबुक पर- https://www.facebook.com/purnima.varman


Saturday, January 02, 2016

डा० राजेन्द्र गौतम

 कवि, समीक्षक और शिक्षाविद के रूप मे डॉ. राजेन्द्र गौतम एक जाना-पहचाना नाम है। बरगद जलते हैं (1998 ), पंख होते हैं समय के (1987) तथा गीत पर्व आया है (1983) उनके चर्चित नवगीत-संग्रह हैं। हरियाणा साहित्य अकादमी ने उनकी कृतियों-- 'बरगद जलते हैं' तथा 'गीतपर्व आया है' को श्रेष्ठ कविता-पुस्तकों के रूप में पुरस्कृत किया है। नवगीत दशक-3, यात्रा में साथ-साथ तथा नवगीत-अर्धशती आदि सभी प्रतनिधि नवगीत-संग्रहों में इनकी रचनाएँ संकलित हैं। एक आलोचक के रूप में उनकी पहचान का आधार पंत का स्वच्छंदतावादी काव्य (2010), दृष्टिपात (1997), पंत के काव्य में आभिजात्यवादी और स्वच्छंदतावादी तत्त्व (1989) तथा हिंदी नवगीत : उद्भव और विकास (1984) जैसे समीक्षा-ग्रंथ हैं। हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित उनकी ललित गद्य-रचनाओं का संग्रह ‘प्रकृति तुम वंद्य हो’ अपनी अलग पहचान रखता है। उनकी 400 से अधिक रचनाएँ हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं मे प्रकाशित और आकाशवाणी तथा दूरदर्शन से प्रसारित हुई हैं। 
डॉ. गौतम को ‘पाकिस्तान अकादमी ऑफ लेटर्स’ द्वारा इस्लामाबाद में 10-11 जनवरी 2013 को “लोकतन्त्र और साहित्य” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मे व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया गया। 'विश्व हिंदी सचिवालय मारीशस' ने भी अपने उद्घाटन-समारोह (12.08.04-22.08.04) में उन्हें साहित्यकार के रूप मे आमंत्रित किया था। उन्होंने अनुवाद एवं तकनीकी शब्दावली के क्षेत्र में भी विशिष्ट कार्य किया है।  
सम्प्रति डॉ. गौतम, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। अपने 41 वर्षों के दीर्घ अध्यापकीय जीवन में वे छात्रों के बीच अत्यधिक लोकप्रियता अर्जित की है। 

सम्पर्क : बी-226 राजनगर-1, पालम, नई दिल्ली-110077
           दूरभाष: 25362321, मो. 9868140469
           ई-मेल:
rajendragautam99@yahoo.com
rajendragautam99203@gmail.com

Saturday, September 20, 2014

प्रमुख साहित्यकार



पं भवानी प्रसाद तिवारी, श्री भवानी प्रसाद मिश्र,श्री अमृत लाल नागर , श्री नरेंद्र शर्मा ,श्री हरिवंशराय बच्चन ,श्री शिवमंगल सिंह सुमन ,श्री माखन लाल चतुर्वेदी एवं श्री सुमित्रानंदन पंत-